04 सितंबर 2009

पत्रकार के उत्पीड़न के विरुद्ध एकजुट हों

साथियों,
पिछली 28 अगस्त को इलाहाबाद केन्द्रीय विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा पहचान पत्र के नाम पर छात्रों को घटों बंधक बनाकर मुर्गा बनावाया गया और तमाम तरह से शारीरिक व मानसिक रुप से प्रताड़ित किया गया। जिसकी तस्दीक 29 तारीख के अखबारों में खुद कुलानुशासक ने अपने बयानों से की है। इसका प्रमाण मानवाधिकार संगठन पीयूसीएल द्वारा मानव संसाधन मंत्रालय और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भेजी गयी सीडी भी है। अब यहां सवाल उठता है कि क्या कोई पत्रकार वो भी जनसत्ता जैसे राष्ट्रीय स्तर के अखबार का जब प्रतिनिधि हो तो उसके द्वारा कुलपति और कुलानुशासक से घटना के संबन्ध में जानकारी क्या नहीं ली जा सकती और लेने पर क्या उस पर मुकदमा दर्ज किया जाएगा? किसी लोकतांत्रिक समाज में अगर सवाल पूछने या उठाने वाले पत्रकार पर मुकदमा दर्ज किया जाता है तो यह हमारे लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है।
साथियों! इस पूरे मसले ने एक बार फिर इस बात को उजागर किया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा लोकतंत्र का गला घोटा जा रहा है और उस पर सवाल उठाने वालों को फर्जी मुकदमें लादकर उन्हें दबाने की कोशिश की जा रही है। हाई कोर्ट के अधिवक्ता और जनसत्ता के प्रतिनिधि राघवेंद्र प्रताप सिंह पर किया गया मुकदमा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है। जहां होना तो यह चाहिए था कि विश्वविद्यालय प्रशासन पर छात्रों के साथ किए गए दुव्र्यवहार का मुकदमा होता। क्योंकि समय-समय पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने शिक्षा संस्थानों में ऐसे अमानवीय दंडों को रोकने के लिए सख्त प्रावधान और दंडात्मक कार्यवायी करने की बात कही है। इस घटना ने इस बात पर भी सवाल उठाया है कि जो विश्वविद्यालय प्रशासन छात्र संघों पर अराजकता का आरोप लगा कर कैम्पसों में आपातकाल घोषित किए हुए है उसे किसने यह अधिकार दिया है कि वह छात्रों को मुर्गा बनवाए या किसी भी प्रकार का शारीरिक दंड दे। इस घटना ने विश्वविद्यालस प्रशासन के लोकतंत्र विरोधी-छात्र विरोधी रवैये को उजागर किया है।
मित्रों, आज जब छात्र संघ समेत लोकतंत्र के चैथे स्तंभ मीडिया पर विश्वविद्यालय प्रशासन नकेल कसने की कोशिश कर रहा है तब ऐसे दौर में यह आवश्यक हो जाता है कि हम विश्वविद्यालय प्रशासन की इन लोकतंत्र विरोधी अपराधों के खिलाफ तमाम बुद्विजीवी, पत्रकार, अधिवक्ता और छात्र एकजुट हों।

निवेदक-
पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल), आॅल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा), स्टूडेंटस फेडरेशन आॅफ इंडिया (एसएफआई), आल इंडिया डेमोक्रेटिक लायर्स एसोसिएशन,प्रोग्रेसिव लायर्स फ्रंट, रोजी रोटी बचाओ मोर्चा, साम्राज्यवाद विरोधी संघर्ष मोर्चा, जर्नलिस्ट यूनियन फॉर सिविल सोसाइटी (जेयूसीएस)

1 टिप्पणी:

Suman ने कहा…

thikhai.

अपना समय