16 सितंबर 2010

हिंदू योद्धा भर्ती अभियान को तत्काल रोके सरकार - JUCS

भगवा ब्रिग्रेड पर तत्तकाल लगे प्रतिबंध  - JUCS
मध्य प्रदेश भाजपा सरकार स्थिति स्पष्ट करे - JUCS

चिदंबरम और दिग्विजय सिंह भगवा ब्रिगेड पर चुप क्यों - JUCS


जर्नलिस्ट यूनियन फॉर सिविल सोसाइटी (JUCS) की मध्य प्रदेश ईकाई ने जबलपुर रेलवे स्टेशन पर ‘भगवा ब्रिगेड का हिंदू योद्धा भर्ती अभियान’ का पोस्टर पाया। यह पोस्टर पूरे मध्य प्रदेश में सार्वजनिक स्थानों पर लगा है। इस पोस्टर में हिन्दुत्वादियों द्वारा प्रस्तावित अयोध्या में राम मंदिर के ढ़ंाचे का छाया चित्र लगा है। इस पोस्टर में स्पष्ट रुप से लिखा है ‘म0 प्र0 में 10000 हिंदू योद्धा की भर्ती अभियान की शुरुआत की है हम हिंदू युवाओं से इस मिशन से जुड़ने की अपील करते हैं’ तब ऐसे में JUCS भाजपा शासित सरकार और मुख्य विपक्ष कांग्रेस की मंशा पर सवाल उठाता है।

इस पोस्टर में भगत सिंह, शिवाजी, चंद्रशेखर आजाद, भीम राव अंबेडकर समेत महान और क्रांतिकारी व्यक्तित्वों के छाया चित्र के साथ सावरकर जैसे व्यक्ति जिसने अग्रेंजों से माफी मांगी थी के छाया चित्र का इस्तेमाल करके भगवा ब्रिगेड युवाओं को अपने सांप्रदायिक एजेंडे पर भड़काना चाहता है। हिंदू योद्धा की भर्ती अभियान की बात करने वाले भगवा ब्रिगेड ने इस तथ्य को प्रमाणित कर दिया है कि हिंदू युवाओं को भड़काकर ऐसे संगठन उनका सैन्यकरण कर सांप्रदायिक और आतंकवादी देशद्रोही गतिविधियों में लिप्त करते हैं।

इस पोस्टर पर भगवा ब्रिगेड के मार्ग दर्शक दामोदर सिंह यादव और संयोजक राजेश विड़कर के छाया चित्र लगे हैं और इनका पता 752 जनता क्वाटर्स, नंदानगर इंदौर और मोबाइल नंम्बर 8120002000, 9977900001 है। ऐसे में JUCS भगवा ब्रिगेड के दोनों नेताओं समेत इस संगठन के पदाधिकारियों और सदस्यों पर देश द्रोह के तहत कार्यवायी करने और दिये हुए पते के मकान को तत्तकाल सीज करने की मांग करता है। ऐसे में JUCS तत्काल प्रभाव से इस भगवा ब्रिगेड के पोस्टर समेत इस संगठन पर प्रतिबंध लगाते हुए इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग करता है क्यों की मध्य प्रदेश से लगातार हिन्दुत्ववादियों के आतंकवादी घटनाओं में लिप्त होने के मामले पिछले दिनों आए हैं।

ऐसे दौर में जब अयोध्या मसले पर फैसला आने वाला है तब ऐसे पोस्टरों का मध्य प्रदेश में जारी होना भाजपा सरकार की मंशा को बताता है कि वो हर हाल में देश का अमन-चैन बिगाड़ने पर उतारु है। वो अब अपने लंपट गिरोह के बजरंगियों को सड़क पर उत्पात करने को छोड़ दी है जैसा बानबे में यूपी में और 2002 में गुजरात में की थी। ऐसे में हम मांग करते हैं कि भाजपा सरकार अपनी स्थिति स्पष्ट करे।

JUCS  ने मध्य प्रदेश में मुख्य विपक्ष कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि वह हिंदू वोट बैंक के खातिर इस गंभीर मसले पर शांत है। क्योंकी सांप्रदयिक तनाव में वह अपना भविष्य खोज रही है। मध्य प्रदेश के पूर्व कांग्रेसी मुख्य मंत्री दिग्विजय सिंह जो संघ गिरोह के आतंक पर यूपी में आकर राजनीति करते हैं वो इस मसले पर क्यों चुप हैं। गृह मंत्री पी चिदंबरम जो इस मसले पर काफी बोल रहे हैं उनको JUCS भगवा ब्रिगेड के इस सांप्रदायिक करतूत को बता रहा है। गृह मंत्री इस गंभीर सांप्रदायिक मसले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करें।

द्वारा जारी-

शाहनवाज आलम, विजय प्रताप, राजीव यादव, शाह आलम, ऋषि सिंह, अवनीश राय, राघवेंद्र प्रताप सिंह, अरुण उरांव, विवके मिश्रा, देवाशीष प्रसून, अंशु माला सिंह, शालिनी बाजपेई, महेश यादव, संदीप दूबे, तारिक शफीक, नवीन कुमार, प्रबुद्ध गौतम, शिवदास,  ओम नागर, हरेराम मिश्रा, मसीहुद्दीन संजरी, राकेश, रवि राव।


संपर्क - 09415254919, 09452800752,09873672153, 09015898445

10 टिप्‍पणियां:

अशोक कुमार पाण्डेय ने कहा…

मैं इस मांग का समर्थन करता हूं…इस बयान को जनपक्ष पर भी प्रकाशित कर रहा हूं…

Sadhak Ummedsingh Baid "Saadhak " ने कहा…

maine aapako pahale hi kaha thaa...aapake abhiyan ka fala hai yah...virodh se virodh shant nahin hua karata...kuchh samajhadaari ki bat ho to karo yaar...ab aag men petrol dalana band karo JUCS

Suresh Chiplunkar ने कहा…

यह सिर्फ़ आव्हान है जिसके सफ़ल होने की उम्मीद कम ही है, क्योंकि सेकुलरिज़्म और गांधीवाद, हिन्दुओं की नसों में ऐसा भरा है कि माओवादी सरेआम नेपाल में एकमात्र हिन्दू राष्ट्र का बलात्कार कर लेते हैं लेकिन इधर कोई प्रदर्शन नहीं होता… कश्मीर में सैकड़ों मन्दिर तोड़े जाते हैं न कोई जाँच न आयोग… इधर हम एक ढांचे को लेकर ही विधवा विलाप करते रहते हैं…

Suresh Chiplunkar ने कहा…

एक- यदि हम अधिक पीछे न जायें तो जून 1975 में इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय ने श्रीमती गांधी को चुनाव में भ्रष्‍ट आचरण का दोषी पाकर छह सालों के लिए चुनाव लड़ने के लिए अयोग्‍य ठहरा दिया था।

इसके खिलाफ प्रदर्शन करवाये गये। जज का पुतला जलाया गया। श्रीमती गांधी ने सर्वोच्‍च न्‍यायालय में फैसले के खिलाफ अपील की। उनके वकील ने न्‍यायालय से कहा,

‘’सारा देश उनके (श्रीमती गांधी के) साथ है। उच्‍च न्‍यायालय के निर्णय पर ‘स्‍टे’ नहीं दिया गया तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।‘’

सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने सशर्त ‘स्‍टे’ दिया। देश में आपात स्थिति लागू कर दी गई, हजारों लोगों को जेलों में बंद कर दिया गया। चुनाव-कानूनों में इस प्रकार परिवर्तन किया गया कि जिन मुद्दों पर श्रीमती गांधी को भ्रष्‍ट-आचरण का दोषी पाया गया था वे आपत्तिजनक नहीं माने गये, वह भी पूर्व-प्रभाव के साथ। कहा गया कि तकनीकी कारणों से जनादेश का उल्‍लंघन नहीं किया जा सकता। प्रगतिशील लोगों ने जय-जयकार की, अर्जुन‍ सिंह तथा शंकरराव चह्वाण ने सबसे अधिक।

Suresh Chiplunkar ने कहा…

दो- कई वर्षों की मुकदमेबाजी तथा नीचे के न्‍यायालयों के कई आदेशों के बाद आखिरकार 1983 में सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने आदेश दिया कि वाराणसी में शिया-कब्रगाह में सुन्नियों की दो कब्रें हटा दी जायें। उत्तर प्रदेश के सुन्नियों ने इस निर्णय पर बवाल खड़ा कर दिया। उत्तर प्रदेश की सरकार ने कहा कि न्यायालय का आदेश लागू करवाने पर राज्य की शांति, व्यवस्था को खतरा पैदा हो जायेगा। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने ही आदेश के कार्यन्वयन पर दस साल की रोक लगा दी।

संविधान के किसी हिमायती ने जबान नहीं खोली।

Suresh Chiplunkar ने कहा…

तीन- 1986 में सर्वोच्च न्यायालय ने घोषित किया कि, जिस मुस्लिम पति ने चालीस साल के बाद अपनी लाचार और बूढ़ी पत्नी को छोड़ दिया है, उसे पत्नी को गुजारा भत्ता देना चाहिये। इसके खिलाफ भावनाएँ भड़काई गईं। सरकार ने डर कर संविधान इस प्रकार बदल दिया कि न्यायालय का फैसला प्रभावहीन हो गया।

”ऐसा नहीं करते तो मुसलमान हथियार उठा लेते”, राजीव भक्तों ने कहा। सेकुलरवादियों ने वाह-वाह की, अर्जुनसिंह, च.ाण ने सर्वाधिक उत्साह के साथ की।

Suresh Chiplunkar ने कहा…

चार-अक्तूबर 1990 में जब वी.पी.सिंह ने मण्डल को उछाला तो उनसे पूछा गया कि यदि न्यायालयों ने आरक्षण-वृद्धि पर रोक लगा दी तो क्या होगा? उन्होंने घोषणा की- हम इस बाधा को हटा देंगे। ‘प्रगतिशील’ लोगों ने उनकी पीठ ठोकी।

पांच- 1991 में सर्वोच्च न्यायालय ने कावेरी जल विवाद पर अपना फैसला सुनाया-

”न्यायाधिकरण के आदेश मानने जरूरी हैं” सरकार ने आदेश लागू नहीं करवाये। ”कर्नाटक जल उठेगा”, सबको यह समझाया गया।

Suresh Chiplunkar ने कहा…

छह- 22 जुलाई 1992 को जब विश्व हिन्दू परिषद की कार-सेवा हर किसी के गुस्से का निशाना बनी हुई थी तो भाजपा के एक सदस्य ने राज्यसभा में पूछा कि रेल विभाग की कितनी जमीन पर लोगों ने अवैध कब्जा जमाया हुआ है? रेल राज्य मंत्री ने स्वीकार किया कि 17 हजार एकड़ भूमि पर अवैध कब्जा है तथा न्यायालयों के आदेशों के बावजूद यह जमीन छुड़ाई नहीं जा सकी है क्योंकि गैरकानूनी ढंग से हड़पी गई जमीन को खाली कराने से शांति भंग होने का खतरा उत्पन्न हो जायेगा।

ऐसी अन्य अनेक घटनाएं हैं जिनकी सूची भाजपा ने जारी की है। इनमें जयपुर के ऐतिहासिक बाजारों में अवैध निर्माण को हटाने के न्यायालय के आदेशों से लेकर कलकत्ता उच्च न्यायालय के एक अवैध मस्जिद को नष्ट करने के आदेशों तक की सूची है, जिनकी अनुपालना शांति भंग होने की आशंका से नहीं की गई। बंगाल की अवैध मस्जिद को तो इसके उलट नियमित कर दिया गया।

आज सभी को न्यायालय के सम्मान की याद आने लगी है… वाह :)

महाशक्ति ने कहा…

Bhatat Mata Ki Jai

jo bhi ab hindu asmista ko aakh dikhayega, uski aakh ko dobara udhane layak nahi rakha jayega, bharat ka do rupalli ka home minister bhagva atankvad bolta hai, aise logo k karn hi hindu me punaa ekta ka sutrapat hoga.

jai shri ram

Babli ने कहा…

आपके ब्लॉग पर आकार बहुत अच्छा लगा! बहुत बढ़िया लिखा है आपने जो काबिले तारीफ़ है! उम्दा प्रस्तुती!
मेरे ब्लोगों पर आपका स्वागत है!

अपना समय