06 जनवरी 2010

“विभूति नारायण राय एक धर्मनिरपेक्ष जातिवादी शख्स हैं”

जब हिंदी लेखक और पुलिस अधिकारी रह चुके विभूति नारायण राय वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति पद पर कार्यभार संभाला था, तो उनसे बहुत सारी उम्मीदें पाल ली गयी थीं। लेकिन आज उन पर दलित विरोधी होने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। विश्वविद्यालय के शिक्षकों और विद्यार्थियों ने उन्हें एक ‘धर्मनिरपेक्ष जातिवादी’ कहना शुरू कर दिया है।

ताज़ा मामला ‘बाबा साहब आंबेडकर सेंटर ऑफ दलित एंड ट्राइबल स्टडीज’ के निदेशक लेला करुण्याकारा के ख़‍िलाफ़ कार्रवाई से संबंधित है। राय की निगाह में करुण्याकारा का ‘अपराध’ यह है कि उन्होंने आंबेडकर परिनिर्वाण दिवस पर विश्वविद्यालय में आयोजित कैंडिल मार्च में शामिल होने की हिमाकत कैसे की। राय ने उनसे इस बात पर स्पष्टीकरण मांगा है कि उस मार्च में ‘उत्तेजक’ नारे क्यों लगाये जा रहे थे। राय की निगाह में ‘इस तरह के’ आयोजन से कैंपस की ‘शांति’ और ‘सदभाव’ को ‘ख़तरा’ पहुंचा है।

अपने विस्तृत जवाब में करुण्याकारा ने कहा है कि यहां लंबे समय से दलितों के ख़‍िलाफ़ बरते जा रहे भेदभाव पर आधारित व्यवहार किया जा रहा है और यहां तक कि ‘धर्मनिरपेक्ष’ कहे जाने वाले लोग भी ऐसा कर रहे हैं। दलित सवालों के संदर्भ में अपना जवाब देते हुए करुण्याकारा ने कहा कि मार्च में लगाये जा रहे नारे जातिवादी नहीं थे, बल्कि जातिवाद के ख़‍िलाफ़ थे। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उन्होंने जो किया है, उसमें कुछ भी ग़लत नहीं है।

करुण्याकारा के जवाब से वीएन राय को ‘संतोष’ नहीं हुआ और उन्होंने उन पर अपने ‘पूर्वाग्रहों’ और ‘निराशा’ निकालने के लिए उस मार्च का ‘इस्तेमाल’ करने का आरोप लगाया। अपने फैसले को सही ठहराते हुए राय ने कहा है कि कई ‘वरिष्ठ’ शिक्षकों ने उन्हें ‘बताया’ कि उस मार्च में बहुत ‘आपत्तिजनक’ नारों का इस्तेमाल किया गया।
(टाइम्‍स ऑफ इंडिया से साभार)

4 टिप्‍पणियां:

Suman ने कहा…

nice

बेनामी ने कहा…

vibhuti ne sare chor bhoomiharo ko bharti kiya hai

बेनामी ने कहा…

क्या पुलिस से कुलपति बने वी.एन. राय मैटर चोर को हेड बना बचा रहे हैं ,

http://sattachakra.blogspot.com/search?updated-min=2009-01-01T00%3A00%3A00%2B05%3A30&updated-max=2010-01-01T00%3A00%3A00%2B05%3A30&max-results=39

is par bhi dekhe vibhooti ke karnamain

saurabh ने कहा…

YE TO SACH HAI KI BHAGWAAN HAI,
MAGAR WO BHI TO HAIRAAN HAI,
WO SOCHA KE O PRESAAN HAI
IS DHARTI PAR VIBHOOTI BHAI JAISE KITNE
AUR BEIMAAN HAI

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