11 सितंबर 2009

निजीकरण के सवाल पर कपिल सिब्बल ने साधी चुप्पी

- संदीप पाण्डेय ने जताया विरोध
- शिक्षा के बाजारीकरण के विरोध में गुलाबी गैंग भी शामिल
- नारे लिखे गुब्बारे लेकर परिसर में की गांधीगीरी
- सामाजिक कार्यकर्ता अरूणा राय व जामिया मिलिया व वर्धा के छात्रों ने किया समर्थन


खबरचौरा (इलाहाबाद) 11 सितम्बर 09/ पत्रकारिता विभाग को बचाने और निजीकरण विरोधी आंदोलन के सम्बंध में कल दिल्ली में पत्रकारों के सवालों पर कपिल सिब्बल की चुप्पी के खिलाफ छात्रों ने रंगबिरंगे गुब्बारे लेकर परिसर में की गांधीगीरी। आज इस आंदोलन का नेतृत्व गुलाबी गैंग की नेता नीलम पाल और सरोज पाल ने किया। सामाजिक कार्यकर्ता अरूणा राय और मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित संदीप पाण्डेय ने आंदोलन का समर्थन किया तो वहीं जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय नई दिल्ली के प्रवीण मालवीय और सरिता व महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रिय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के छात्रों ने भी अपने समर्थन पात्र भेजें.
पत्रकारिता विभाग के छात्रों ने आज अपनी मांगो पर मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल की चुप्पी के खिलाफ रंग-बिरंगे गुब्बारे लेकर विरोध जताते हुए मांग की कि कपिल सिब्बल इसका जवाब दें। छात्रों ने कहा कि हमारे निजीकरण विरोधी आंदोलन पर न तो विश्वविद्यालय प्रशासन जवाब दे रहा और न ही सरकार। ऐसे में आज हमने नारे लिखे गुब्बारों के माध्यम से अपनी मांगो को रखा। जिनपर लिखा था ‘‘शिक्षा के बाजारीकरण विरोधी आंदोलन पर चुप्पी क्यों कपिल सिब्बल जवाब दो, पत्रकारिता की बाजार में नीलामी क्यांे कपिल सिब्बल जवाब दो।’’ संदीप पाण्डेय ने भी कपिल सिब्बल की चुप्पी पर विरोध जताया।
आंदोलन के समर्थन में गुलाबी गैंग की नेत्री नीलम पाल और सरोज पाल आईं और उन्होंने कहा कि जिस तरह लाखों रूपये वसूलने की तैयारी यहां चल रही है उससे हमारे ग्रामीण इलाकों के बच्चें विश्वविद्यालय का मुह कभी नहीं देख पायेंगे। इस आंदोलन का समर्थन करते हुए संदीप पांण्डेय ने कहा कि शि़क्षा के बाजारीकरण के खिलाफ चल रहे इस राष्ट्रीय आंदोलन पर मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल के चुप्पी ने सरकार के मंसूबों को साफ कर दिया है। उन्होंने बताया कि आन्दोंलन के समर्थन में वे जल्द इलाहाबाद आयेंगे। इस आन्दोंलन के समर्थन में देश के कोने-कोने के विश्ववि़द्यालयों के छात्रों का समर्थन मिलने लगा है। जामिया मिलिया इस्लामिया के पुरा छात्रों ने भी समर्थन पत्र जारी किया। जामिया की पुरा छात्रा सरिता ने कहा कि यह आंदोलन शिक्षा के निजीकरण के खिलाफ संगठित प्रतिवाद बनेगा। और उन्होंने यह भी जानकारी दी कि उनका प्रतिनिधि मंडल जल्द ही इलाहाबाद आयेंगा।
‘‘सवाल पूछते रहो’’ अभियान के तहत आज विभाग की छात्रा विभूति सिंह ने पिछले दिनों विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा सीनेेट हाॅल में एक निजी कम्पनी द्वारा कुलपति का जन्मदिवस को प्रायोजित करने को लेकर सवाल किया कि क्या सीनेट हाॅल में शादी-व्याह, तेरहवीं और जन्मदिन जैसे अवसरों के लिए क्या आवांटित किया जा सकता है। छात्रा ने यह भी पूछा है कि विश्वविद्यालय में ऐसे कौन-कौन से शिक्षक हैं जो शिक्षण कार्य के अलावा प्रशासनिक व अन्य ऐसे पदों पर नियुक्त हैं ? और केन्दीय दर्जा मिलने के बाद से पुस्तकालय को प्राप्त अनुदान व खरीदी गयी किताबों का ब्योरा भी मांगा है।
समस्त छात्र
पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग
इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबाद

2 टिप्‍पणियां:

pratibha ने कहा…

इस महत्वपूर्ण आन्दोलन के कई सुखद पहलू हैं. एक तो यही कि पत्रकारिता का पहला पाठ ये छात्र खुद ही लिख भी रहे हैं और पढ़ भी रहे हैं. ऐसे आन्दोलनों ने हमेशा इस विश्वास को जिलाए रखा है कि दौर कितना भी मुश्किल हो, काफी कुछ है जिसे बचाया जाना चाहिए. देश के कई हिस्से में लोगों को आन्दोलित भी कर रहा है ये आन्दोलन. सबको बधाई!

antaryatri ने कहा…

bhaskar me aap logo ki story aai hai .link dekhe.
http://www.bhaskar.com/2009/09/12/090912111341_allahbad_university.html

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