13 नवंबर 2009

एडीजी के बयान पर मानवाधिकार संगठन आक्रोशित

- पीयूसीएल ने मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई

13 नवम्बर, 09।
इलाहाबाद

उत्तर प्रदेश पुलिस के एडीजी (कानून व्यवस्था) बृजलाल के उस बयान पर मानवाधिकार संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है जिसमें उन्होंने सोनभद्र में कमलेश चौधरी के मुठभेड़ पर सवाल उठा रहे मानवाधिकार संगठनांे पर कार्रवाई की बात कही थी। कई संगठनांे ने बृजलाल के इस बयान को उत्तर प्रदेश में लोकतंत्र के लगातार घटते स्थान का परिचायक बताया है और राज्य सरकार से एडीजी बृजलाल को तुरंत हटाने की मांग की है।

मानवाधिकार संगठन पीपुल्स यूनियन फाॅर सिविल लिबर्टिज (पीयूसीएल) ने अपनी 8 नवम्बर को बिहार के रोहतास जिले से पांच युवकों के उठाए जाने व उनमें से एक कमलेश चैधरी को सोनभद्र जिले में चोपन के पास एक कथित मुठभेड़ में मार गिराए जाने के खिलाफ अपनी प्रारम्भिक तफ्तीश के आधार पर मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखकर इस पूरे मामले की जांच की मंग की थी। संगठन ने अपने पत्र में पुलिस द्वारा उठाए गए युवक मोतीलाल खरवार, कामेष्वर यादव सहित दो अन्य युवकों को तुरंत किसी अदालत में पेश करने की मांग की थी। जिसके बाद एडीजी बृजलाल ने दैनिक समाचार पत्रों से बातचीत में पुलिस पर सवाल उठाने वालों को नक्सलियांे का समर्थक करार देते हुए धमकी भरे अंदाज में कार्रवाई की चेतावनी दी थी। पीयूसीएल के राष्ट्रीय सचिव चितरंजन सिंह ने बृजलाल के इस बयान पर कड़ी आपत्ति जातते हुए कहा कि यह आम नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का हनन है। मुठभेड़ या पुलिस उत्पीड़न पर सवाल उठाना किसी भी मानवाधिकार संगठन का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि एडीजी बृजलाल के इस बयान के खिलाफ संगठन कोर्ट में अपील करेगा।
पूर्व पुलिस महानिदेशक एस आर दारापुरी ने अपने बयान में कहा कि उत्तर प्रदेश लगातार फर्जी मुठभेड़ों का गढ़ बनता जा रहा है। मानवाधिकार उल्लघंन के मामले में यहां की पुलिस अव्वल साबित हो रही है। दारापुरी ने एडीजी के बयान पर सख्त आपत्ति जताते हुए कहा कि मानवाधिकार संगठनों पर कार्रवाई की धमकी देना खुद उनके पुलिसिया तंत्र पर सवाल उठाता है। ह्यूमन राइट्स लाॅ नेटवर्क (एचआरएल) के उत्तर प्रदेश संयोजक केके राय व पीयूएचआर के नेता सत्येन्द्र सिंह ने भी पुलिस अधिकारी के इस बयान पर कड़ी आपत्ति व्यक्त करते हुए राश्ट्ीय मानवाधिकार आयोग से ऐसे अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष एडवोकेट जमील आजमी ने कहा कि लोकतंत्र में किसी पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाना कहीं से भी गलत नहीं है। पुलिस को सवालों उठाने वालों को धमकाने की बजाए खुद अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाना चाहिए। मैग्सेसे पुरस्कार प्राप्त संदीप पाण्डेय ने कहा कि राज्य में पिछले कुछ समय से मानवाधिकारों के लिए लगातार स्थान कम हो रहा है। मानवाधिकार उल्लघंन मामले में पुलिस का रिकार्ड पहले ही खराब है। ऐसे में एडीजी का यह बयान खुद उनकी कार्यशैली पर सवाल उठा रहा है। पीयूसीएल के राज्य कार्यकारिणी सदस्य विनय शाक्य राजीव यादव, शाहनवाज आलम, विजय प्रताप, बलवंत यादव, मानवाधिकार संगठन एपीसीआर के माहताब आलम, जर्नलिस्ट यूनियन फाॅर सिविल सोसायटी (जेयूसीएस) के लक्ष्मण प्रसाद व ऋषि कुमार सिंह ने भी बृजलाल के बयान व उनकी भाषा पर कड़ी आपत्ति व्यक्त करते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखा है।

तस्वीर - दैनिक हिंदुस्तान (13 नवम्बर,09) में एडीजी बृजलाल का बयान. पढ़ने के लिए तस्वीर पर क्लिक करे.


राजीव यादव, 09452800752
विजय प्रताप, 09982664458
शाहनवाज आलम, 09415254919

1 टिप्पणी:

श्याम कोरी 'उदय' ने कहा…

... apne desh men kuchh-bhee sambhav hai, yahaan koi system imaandaaree se kaam kartaa jaan nahee padataa hai, chaaron aur andheraa-hi-andheraa hai, agar kaheen koi ujaale kee kiran hai bhee to vah bhee andheron ko cheerane men saksham nahee jaan padatee hai !!!!

अपना समय